धृतराष्ट्र का रोल करना बहुत मुश्किल और थकान भरा था- गिरिजा शंकर


- प्रदीप सरदाना 


वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म-टीवी समीक्षक 


गिरिजा शंकर ऐसे अभिनेता हैं जिनके इन दिनों एक साथ 4 सीरियल का प्रसारण विभिन्न चैनल्स पर हो रहा है। जिनमें 'बुनियाद', 'अलिफ लैला' और 'उतरन' के साथ वह ‘महाभारत’ सीरियल भी है जिसमें गिरिजा धृतराष्ट्र की भूमिका करके सर्वाधिक लोकप्रिय हुए। ‘महाभारत’ इन दिनों कितना लोकप्रिय हो रहा है, यह किसी से छिपा नहीं है। ये कोई छोटी बात नहीं है कि इन दिनों बीआर चोपड़ा के महाभारत का प्रसारण स्टार भारत, कलर्स और डीडी रेट्रो जैसे तीन चैनल पर एक साथ हो रहा है। गिरिजा शंकर पिछले कुछ बरसों से अमेरिका के लॉस एंजल्स में सेटल हो गए हैं। लेकिन उनसे मेरा परिचय बरसों पुराना है, ‘महाभारत’ से भी पहले से।


'महाभारत' में उनकी धृतराष्ट्र की भूमिका को इतना पसंद किया गया कि इसके लिए गिरिजा शंकर को सितंबर 1989 में हमने उन्हें अपनी पत्रकारों, लेखकों और कलाकारों की संस्था 'आधारशिला' की ओर से, 'आधारशिला' पुरस्कार से सम्मानित भी किया था। 



हाल ही में गिरिजा से फोन पर बात हुई तो मैंने उनसे सबसे पहले यही पूछा कि क्या आप अमेरिका में भी इन दिनों ‘महाभारत’ का प्रसारण देख रहे हैं? इस पर गिरिजा कहते हैं- “जी बिलकुल यहाँ भी यह कई प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। मुझे आए दिन जगह जगह से लोगों के फोन आ रहे हैं, सभी जगह से अच्छा रिस्पोंस मिल रहा है। ज़ाहिर है मैं भी खुश हूँ कि मेरे इन दिनों ‘महाभारत’ के साथ और भी तीन सीरियल चल रहे हैं।" 



उधर गिरिजा अपने पुराने दिनों को याद करते हुए यह भी कहते हैं, “मैं तब 27 साल का था जब मैंने धृतराष्ट्र की भूमिका की थी। बीआर चोपड़ा साहब ने पृथ्वी थिएटर में मेरा एक प्ले देखने के बाद मेरे काम की बहुत तारीफ की थी। उसके बाद उन्होंने मुझे अपने ‘बहादुर शाह जफर’ जैसे सीरियल में भी लिया और ‘आज की आवाज़’ फिल्म में भी। लेकिन जब उन्होंने मुझे एक नेत्रहीन राजा धृतराष्ट्र का रोल ऑफर किया तो मैं दुविधा में था कि क्या करूँ। तब मैं धृतराष्ट्र के बारे में ज्यादा नहीं जानता था।



लेकिन जब मैंने ‘महाभारत’ पढ़ी तो जाना कि ‘महाभारत’ की मूल कथा तो कृष्ण और धृतराष्ट पर ही केन्द्रित है। तब अंधे व्यक्ति का रोल करना बहुत मुश्किल और थकान भरा था। रवि चोपड़ा चाहते थे कि मैं आँखों में लेंस डालकर ये रोल करूँ लेकिन मैंने बिना लेंस के वह सब किया तो वह बहुत खुश हुए।


आज भी अपनी भूमिका देखकर मुझे अच्छा लगता है कि मैं इसे परफेक्शन के साथ निभा सका। क्योंकि मैं अब खुद हॉलीवुड में रहकर अपने प्रॉडक्शन हाउस से फिल्में बना रहा हूँ, तो और भी अच्छे से समझ सकता हूँ कि यह रोल कितना मुश्किल था।


( प्रदीप सरदाना टीवी पर पत्रकारिता शुरू करने वाले भारत के पहले पत्रकार हैं)