ज्ञान का भंडार है ‘भारत’ वार्षिकी


       ज्ञान का भंडार है 'भारत' वार्षिकी


कृतार्थ सरदाना


यूं देश भर में ऐसे कई प्रकाशन हैं जो प्रतिवर्ष भारत को लेकर वार्षिकी प्रकाशित करते हैं। लेकिन भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग की 'भारत' वार्षिकी की बात ही कुछ और है। पिछले दिनों प्रकाशित प्रकाशन विभाग की 'भारत'-2019 वार्षिकी को देखकर भी साफ शब्दों में कहा जा सकता है कि 'भारत' वार्षिकी ज्ञान का अनुपम भंडार है।


इस वार्षिकी को हम अन्य प्रकाशनों की वार्षिकी से श्रेष्ठ इसलिए भी कहते हैं कि इसमें प्रकाशित सामग्री के आंकड़े भारत सरकार के अपने आंकड़े हैं, इसलिए वे अधिक प्रामाणिक हैं। उन पर सहजता से भरोसा किया जा सकता है। देश के किसी भी क्षेत्र की वार्षिक उपलब्धियों को जानना हो या किसी मंत्रालय, विभाग के विभिन्न कार्यकलापों के इतिहास और वर्तमान को तो 'भारत' को प्रति वर्ष नियमित रूप से पढ़ना चाहिए, इसे अपने पास सँजोकर रखना चाहिए।


'भारत-2019' की ही बात करें इसकी शुरुआत भारत भूमि और उसके निवासी से होती है। इस पहले अध्याय भारत को किसी भी रूप में सुगमता से जाना सकता है। भारत की भौगोलिक पृष्ठभूमि क्या है, इसकी प्राकृतिक संरचना कैसी है से लेकर कुल जनसंख्या,लिंग अनुपात, साक्षरता, जलवायु, ऋतुएँ,वनस्पति और देश की नदियों तक। इसी के साथ दूसरे अध्याय राष्ट्रीय प्रतीक में राष्ट्रीय  ध्वज, हमारे तिरंगे को लेकर सभी महत्वपूर्ण जानकारी है तो भारत के राज चिह्न अशोक के सिंह स्तम्भ, सत्यमेव जयते और राष्ट्रगान और राष्ट्रीयगीत को लेकर भी।


उसके बाद भारत की राजनीतिक संरचना में देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के नाम आदि के साथ नागरिकता, मौलिक अधिकार और कर्तव्यों के साथ राज्य के नीति निदेशक सिद्दांतों को लेकर जानकारी है तो कार्यपालिका में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति,मंत्रिपरिषद,विधायिका, राज्यसभा, लोकसभा और संसद के कार्यों और अधिकार को लेकर विभिन्न जानकारियाँ हैं। साथ ही पहली लोकसभा से 16 वीं लोकसभा की अवधि और लोकसभा अध्यक्षों के नाम और उनके कार्यकाल का विवरण हैं ।


राजनैतिक संरचना का यह खंड इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसमें संसद को लेकर ऐसी बहुत सी जानकारी है जिसके बारे में आम पाठक प्रायः नहीं जानते।मसलन संसदीय समितियां,सलाहकार समितियां,सद्दभावना शिष्ट मण्डल। या फिर नियंत्रक तथा महालेखा परीक्षक,अटॉर्नी जनरल और सॉलिसीटर जनरल। लेकिन ये समितियां और ये पद क्या हैं इनका क्या महत्व और शक्तियाँ हैं ये सब 'भारत' से आसानी से जाना और समझा जा सकता हैं। इसी अध्याय में मंत्रीमण्डल सचिवालय, राज्यों के राज्यपाल, मंत्रीपरिषद और केंद्रशासित प्रदेशों से लेकर नगरपालिकाएँ और पंचायत आदि तक भी जानकारी है। साथ ही भारतीय निर्वाचन आयोग की जानकारी का भी समावेश इसमें किया गया है।


'भारत' वार्षिकी के अन्य प्रमुख खंडों में कृषि, संस्कृति और पर्यटन, रक्षा, शिक्षा, मूल आर्थिक आंकड़े हैं तो वाणिज्य, संचार और सूचना प्रोद्योगिकी, ऊर्जा,पर्यावरण,वित्त,कॉर्पोरेट मामले, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति के साथ आवास-शहरी विकास मंत्रालयों को लेकर भी काफी जानकारी है। संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय के बारे में तो ऐसी कई जानकारियाँ इसमें दी हैं, जो अन्यत्र आसानी से नहीं मिलतीं। जैसे संगीत नाटक अकादमी, साहित्य कला परिषद, ललित काला अकादमी और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राष्ट्रीय स्मारक तथा देश के विभिन्न संग्रहालय। इन सभी के बारे में 'भारत' में विस्तार से जाना जा सकता है। इन अकादमी में बहुत सी ऐसी फ़ेलोशिप और अनुदान एवं पुरस्कार योजना हैं जिनके बारे में अधिकांश लोग नहीं जानते। इसीलिए अनेक लोग ऐसी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित भी रह जाते हैं।


'भारत' वार्षिकी के अन्य अध्यायों में एक और अहम अध्याय भारत और विश्व का भी है। जिसमें भारत के पड़ोसी देशों के साथ की विशेष चर्चा है। इनमें अफगानिस्तान,बांग्लादेश, भूटान,नेपाल,चीन, श्रीलंका,मयामां और पाकिस्तान के साथ मारिशस, मालदीव भी हैं। वहाँ दक्षिण-पूर्व एशिया, पूर्व एशिया,खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया के साथ अफ्रीका,आदि के साथ भारत के विभिन्न सम्बन्धों और पुराने रिश्तों की बानगी पेश की गयी है। इस बानगी में कुछ देशों में भारतीय प्रधानमंत्री पी एम मोदी की वहाँ की गयी यात्राओं का भी उल्लेख है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न राष्ट्रों के विभिन्न संगठनों की भी चर्चा इसमें है।


इसके बाद इस पुस्तक में उढ्योग के अध्याय में देश के विभिन्न उद्द्योग धंधों के बारे में विस्तार से बताया है। भारत आज किस उद्द्योग में कहाँ खड़ा है। कौन कौन सी सार्वजनिक इकाइयां क्या क्या काम कर रही हैं। इसके अलावा मेक इन इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, इन्वेस्ट इंडिया आदि की जानकारी भी इसमें है। इसके बाद विधि और न्याय खंड में भारतीय विधि व्यवस्था, उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के साथ देश के विभिन्न 24 उच्च न्यायालयों के नाम, प्रमुख पीठ और अधिकार क्षेत्र भी बताए गए हैं। इन सभी के साथ प्रवर्तन एजेंसियों जैसे पुलिस, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, सीमा सुरक्षा बल, असम राइफल्स, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड, केन्द्रीय पुलिस आदि के साथ होम गार्ड, दमकल सेवा की भी जानकारी है। साथ ही पर्सनल लॉं में विवाह के साथ गोद लेना, भरण पोषण और उत्तराधिकार आदि पर भी ऐसी जानकारी है कि जिसे जानने के लिए कभी काफी इधर उधर भटकना पड़ता है।


पुस्तक का एक और भाग जो अहम होने के साथ दिलचस्प भी है वह है-जनसंचार। इसमें प्रसार भारती बोर्ड, दूरदर्शन, आकाशवाणी क्षेत्रीय चैनल की तो जानकारी है ही साथ ही फिल्म समारोह निदेशालय, फिल्म प्रभाग, भारतीय प्रेस परिषद, पत्र सूचना कार्यालय, प्रकाशन विभाग, विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय, बाल चित्र समिति, भारतीय जन संचार संस्थान, भारतीय फिल्म और टेलीविज़न संस्थान और गीत एवं नाटक प्रभाग सहित कुछ और भी अहम विभागों के बारे में बहुत सी जानकारी यहाँ सुगमता से उपलब्ध है।


'भारत' वार्षिकी में इन सबके साथ जो अन्य विवरण प्रस्तुत किए हैं उनमें श्रम कौशल और रोजगार, आयोजना, ग्रामीण और शहरी विकास, वैज्ञानिक और प्रोद्धयोगिकी विकास, जल संसाधन, कल्याण तथा युवा मामले और खेल। साथ ही राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश अध्याय में देश के सभी राज्यों आदि का विस्तृत विवरण है।


फिर सामान्य सूचना का अध्याय तो बेहद जानकारी भरा है जिसमें देश के अब तक के समस्त राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के साथ देश की तीनों सेनाओं के प्रमुख, भारत के  मुख्य न्यायधीश, मुख्य निर्वाचन आयुक्त, केबिनेट सचिव, संघ लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष के नाम और उनके कार्यकाल की अवधि का पूर्ण विवरण इसमें है। यहाँ तक अब तक भारत रत्न बने सभी महानुभावों के नाम भी हैं और उन 8 भारतीयों का संक्षिप्त परिचय भी जिन्हें अब तक नोबेल पुरस्कार मिला है। यूं तो पुस्तक में सभी सांसदों और मंत्रिपरिषद का भी पूरा विवरण है। लेकिन इसमें समय समय पर बदलाव होने के कारण उसकी प्रासंगिकता ज्यादा नहीं रह पाती।


कुल मिलाकर 'भारत' वार्षिक गागर में सागर के समान है। भारत में रहने वाले नागरिकों और भारत को अच्छे से जानने के इच्छुक सभी के लिए यह बेहद उपयोगी है। पुस्तक की छपाई भी उत्तम है।


भारत -2019


संपादक-राकेश रेणु, रेमी कुमारी


मूल्य-350 रुपए


पृष्ठ -746


प्रकाशक-प्रकाशन विभाग, दिल्ली